राबता तुमसे

हर मुद्दे की है इब्तिदा तुमसे हर अज़ाब की है दवा तुमसे एक राज़ की बात बताऊँ तुम्हें इश्क़ करता हूँ बे-इंतिहा तुमसे ज़माना भुला चुका है कम्बख्त दिल को…

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Guftagu

इस नाज़-ओ-अंदाज़ से उसने गुफ़्तुगू की दिल ने फ़िर मुहब्बत की जुस्तजू की दिल फिसलने से आखिर बचता भी कैसे बात ही कुछ और थी उस खूब-रू की कूचा-ए-मुहब्बत का…

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