अजनबी

क्या तुम मेरी परछाई हो कुछ खास बताने आई हो या तुम कोई तन्हाई हो मुझसे बतियाने आई हो शायद तुम मेरा माज़ी हो जो मुझसे मिलने राज़ी हो या…

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रूह

ज़िन्दगी अपनी खूबसूरत है इसे किसकी अब ज़रूरत है   वफ़ा इख़्लास हिज्र क़ुर्बानी यही एहसास तो मुहब्बत है   रूह को रूह से जुदा कर दे हिज्र की इन्तेहाँ…

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