मन का रावण

अरे ! तुझे मालूम भी है , की तू जिस झूठी इज़्ज़त , नाम और शौहरत की तलाश मे है, उसे हासिल करने के खातिर तेरे आजू-बाजू खड़ा हर टुच्चा , तुझसे भी कहीं ज्यादा मेहनत करता है. अरे! छोड़ ये बेचारों की तरह इधर-उधर मुह मारना , अब तो सुन ले और कर ले अपने दिल की , अरे शेर-दिल इंसान भी क्या , किसी के इशारों पे मुजरा किया करता है |

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