बचपन और ए दोस्त

अब बड़े हो  गए ज़िम्मेदारियों से भर गए, बचपन में निश्चिन्त बड़ी ख़ुशी ख़ुशी रहा करते थे, ना कोई ज़िम्मेदारी का अहसास था ना किसी चीज़ की फ़िकर, बस ख़ुद की ही दुनिया में मश्रूफ रहा करते थे, कोई तो लौटा दे वो बचपन मुझे अब, जो ना जाने कही खो गया है।

Continue Reading

सावन

यह सावन के झूले, वो बारिश का पानी, यह टिप टिप करती बूँदे वो मौसम की रवान, सबके लबों पर ख़ुशियों का पैग़ाम लाया रे, सावन आया रे सखी, सावन आया रे। 

Continue Reading
Close Menu