उर्दू नज्मे 

तेरा ख़याल  Urdu Poetry By Sujay Phatak  (मुनफ़रिद की कलम से)    तेरी यादों के साये में छिप कर मता-ए-जाँ मैं कभी तन्हा नहीं रहता तेरी अखड़ियों में ग़ुम हो…

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हसरतें

रूह को रूह से जुदा कर दे हिज्र की इन्तेहाँ ही फ़ुर्क़त है हालतें देख कर मेरी उसको हो गयी मुझ से ही मुरव्वत है

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इश्क़

बड़ी बदनाम है लड़की शहर की मुहब्बत हो गयी उस ही से मुझको वो दिल की चारा-साज़ी और ही थी मिला था दर्द जब उस ही से मुझको

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