बचपन और ए दोस्त

अब बड़े हो  गए ज़िम्मेदारियों से भर गए, बचपन में निश्चिन्त बड़ी ख़ुशी ख़ुशी रहा करते थे, ना कोई ज़िम्मेदारी का अहसास था ना किसी चीज़ की फ़िकर, बस ख़ुद की ही दुनिया में मश्रूफ रहा करते थे, कोई तो लौटा दे वो बचपन मुझे अब, जो ना जाने कही खो गया है।

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मन का रावण

अरे ! तुझे मालूम भी है , की तू जिस झूठी इज़्ज़त , नाम और शौहरत की तलाश मे है, उसे हासिल करने के खातिर तेरे आजू-बाजू खड़ा हर टुच्चा , तुझसे भी कहीं ज्यादा मेहनत करता है. अरे! छोड़ ये बेचारों की तरह इधर-उधर मुह मारना , अब तो सुन ले और कर ले अपने दिल की , अरे शेर-दिल इंसान भी क्या , किसी के इशारों पे मुजरा किया करता है |

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माँ

धीरे धीरे दिन चढ़ता गया और जोश भी ठंडा होता गया।शायद 40 साल का lockdown था और थकान भी। पूरी ज़िंदगी रसोई और पूजा घर मे जो निकला था। कभी दुसरो की पेट पूजा तो कभी भगवान की पूजा , और आशीर्वाद में मिला तो क्या घुटनो में दर्द और कई ऐसे दर्द जो अंदर ही अंदर दब गए हैं रीति रिवाजों के तले।

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ज़िन्दगी

पर तू उदास मत होना ए 'ज़िन्दगी', आऊंगा कभी वही पुरानी यादे लेकर, मन की वो आज़ादी का एहसास जो कहीं खो गया है वो लेकर,

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दोस्ती

Dosti is a poem on friendship in hindi. लड़खड़ाए पैर मेरा तो साथ देना तुम फिसले  पैर तुम्हारा तो हाथ देंगे हम भी .............................

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तनहाई

तनहाई दो प्रेमियों की जुदाई को प्रस्तुत करती हिंदी कविता है | हर तनहाई में याद आती है तेरी ........हर महफिल में नजर ढूंढती है तुझे..............................

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