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Guftagu

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इस नाज़-ओ-अंदाज़ से उसने गुफ़्तुगू की

दिल ने फ़िर मुहब्बत की जुस्तजू की

दिल फिसलने से आखिर बचता भी कैसे

बात ही कुछ और थी उस खूब-रू की

कूचा-ए-मुहब्बत का तय करने को सफर

हमने खुद की चाक-गरेबाँनी रफ़ू की

अंजाम-ए-इश्क़ न मिला कोई गिला नहीं

मुहब्बत की बे-इन्तेहाँ औ बा-वज़ू की

हिज्र का ख़त पढ़ आये अपने यार का

बादा-कश हो गए तर्क-ए-आरज़ू की

Sujay phatak

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