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माँ

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Hindi Kavitayen – Priyashankar Gosh

माँ ..Hindi Poem- Catch Your Breath

This is Dedicated to all mothers who have been locked up in kitchen and customs since ages..

आज भी हमेशा की तरह वह सुबह 5 बजे उठी, कुछ नया नहीं था करने के लिए। वही झाड़ू पोछा सबका नास्ता फिर पूजा ।धीरे धीरे दिन चढ़ता गया और जोश भी ठंडा होता गया।शायद 40 साल का lockdown था और थकान भी। पूरी ज़िंदगी रसोई और पूजा घर मे जो निकला था। कभी दुसरो की पेट पूजा तो कभी भगवान की पूजा , और आशीर्वाद में मिला तो क्या घुटनो में दर्द और कई ऐसे दर्द जो अंदर ही अंदर दब गए हैं रीति रिवाजों के तले। हम चंद दिनों में बेक़ाबू हो चुके है। घर से निकलने के लिए फड़फड़ा रहे हैं। लेकिन कई ऐसी अनगिनत महिलाएं होंगी जो पर्दों, घूंघटो, रशोई आंगन और ना जाने कितने जगह सदियों से lockdown होंगी।


 

 

डर

ना मैं अपने बाप से डरता हूं

अपने आप से डरता हूं

किए हुए पाप से डरता हूं

 

किसी के दुख से डरता हूं

किसी की भूख से डरता हूं

 

बोले हर झूठ से डरता हूं

नेताओं की लूट से डरता हूं

 

मैं जातिवाद से डरता हूं

पनपते पूंजीवाद से डरता हूं

 

तुम्हारे धर्म से डरता हूं

हो रहे अधर्म से डरता हूं

 

डूबते सूरज से डरता हूं

कल के उजाले से डरता हूं

 

ना मैं अपने बाप से डरता हूं

 फिर भी ….

आजकल डर डर करता रहता हूं

 

Priyashankash Ghosh

Cenemetographer …Story…Teller Explorer

https://www.youtube.com/channel/UCE0ENBmawo_cU8N08tjFuwQ

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