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Human Trafficking

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कभी कोई बच्चा खो जाता  है,

तो कभी कोई अपना जिस्म बेच देता है,

कभी कोई रोटी के लिए रोता है,

तो कभी कोई उसी रोटी के लिए हंसाता है.

लेकिन .. क्या तुमने उसे देखा?

जाब मंगते हुए हात आगे बढ़ गए,

तब गाड़ियों के शीशे ऊपर चढ़ते गए,

किसी की नजरे झुकी,

तो किस की नियत रुकी.

कोइ बच्चा  भिक मांगे तो तु गुस्सा होता हे?

पिघलता हे जब कोई बूढ़ा तेरे समने हाथ फैलाए रोता है.

खाना ??  हाँ  वही खना जो हम अपनी प्लेट मैं छोड़ देते हैं,

उसी के लिए कितने सारे रोते,

किसी के साथ सोते हैं,

अपने ही दामन में कांटे बोते हैं.

तू, हाँ  तू .

तू गाड़ियों में घूमता है अच्छे लिबास पहनता हैं,

फिर तु क्युँ  नाहि किसी  नंगे की आवाज सुनता है?

जब तु सपनो में रातभर खोता है,

तब वहां कोई नींद के लिए रोता है,

जब कोई तेरा खाना परोसाता है,

तो वहां कोइ अपने नसीब को कोसते हैं.

सोशल मीडिया पे बडा आके बोलता है,

“प्लीज हेल्प सम नीडी”.

क्युँ  तू खूद नहीं बनता किसी की सिढी ?

जाना के यह ट्रैफिकिंग का धंधा है …

लेकिन चल आजा, बाचा ले उन्हें,

क्यु की तू ही वो बंदा हे.

हजार रुपए खर्च करने वाले आज लगे दस रुपए तुझे महंगे,

माना के यह तेरे अकेले का काम नहीं,

आजा .. आज कुछ मिल कर करते  हैं.

किसी को खाना देते हैं, किसी के आंसू रोकते हैं,

किसी को बचाते हैं, किसी को संभालते हैं.

क्या तू कर पाएगा?

कार के शीशे खोल, अपनी नजरें उठा, अपनी नियत जगा.

और पूछ ले एक बार क्या आप किसी से डरते हैं?

 एक फोन लागा … वरदी तेरे साथ है ।।

 जज्बा दिखा … तो हम सब तेरे साथ है।

– Snehaal Deshpande & Aniket Kale

#Snehiket

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This Post Has One Comment

  1. True and touchy…

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