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कठपुतली

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Hindi Kavita- Life poem

Hindi Kavita | Poem on lifeउसने

कठपुतली सी,

धागे से बाँध

एक ख़ुशी मेरे सामने फेंकी थी ।

धागे के इस छोर से

बंधी कठपुतली

और बिन धागे के

उस कठपुतली से बंधा मैं ।

रम गया

उस कठपुतली की नाच में।

खूब नचाया उसने मुझे,

मैं भी खूब नाचा ।

थका नहीं,

रोक लिया गया।

उसने मेरी खुशियाँ बटोरी,

गठरी में बाँधा

और जाने लगा।

उसे यही तमाशा

कहीं और भी दिखाना था।

-कुन्दन रॉय

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